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वार्षिक रिपोर्ट 2007-08
Posted on May 6th, 2009 No commentsमहानुभावों,
मीमांसा एक पहल की इस पहली वार्षिक सभा में आप सबका हार्दिक स्वागत है।
‘मीमांसा एक पहल’ साहित्य, कला और जीवन के प्रति समर्पित संस्था है। रचनात्मक विकास के जरिए जीवन में गुणात्मक समृद्धि की संभावनाओं को तलाशती हुई संस्था मनुष्यता के मार्ग की उलझनों और दुविधाओं को दूर करने के लिए प्रयासरत है। समाज में परस्पर सहयोग, सौहार्द और संवाद का वातावरण निर्मित हो सके, इसके लिए रचनात्मक परिवेश का होना जरूरी है। रचनात्मक परिवेश और रचनात्मक समाज में आम आदमी की वाजिब चिंताएं और उनके बेहतरी का सवाल स्वत: ही महत्वपूर्ण हो जाता है। और फिर बेहतर सोच, बेहतर संवाद और बेहतर समाज के निर्माण की परिस्थिति बनने लगती है। संस्था पिछले कुछ समय से रचनात्मक परिवेश के निर्माण की दिशा में निरन्तर कार्यरत है। विशेषकर छात्रों और युवाओं के बीच सक्रयि यह संस्था समय-समय पर अनेक सामाजिक, साहित्यिक, सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन करती है।
पहली बार 18 फरवरी 2006 को संस्था की ओर से ‘वसंतोत्सव’ के आयोजन के जरिए एक कार्यक्रम किया गया या यूं कहें कि उक्त कार्यक्रम के लिए संस्था के निर्माण का प्रस्ताव सामने आया। इस कार्यक्रम में सामाजिक संबंधों का बदलता स्वरूप विषय पर एक सेमीनार के अतिरिक्त कवि सम्मेलन का आयोजन भी किया गया जिसमें विश्वविद्यालय के युवा कवियों ने देश के प्रतिष्ठित कवियों की उपस्थिति में अपनी काव्य प्रतिभा का परिचय दिया। उसके बाद 19 जनवरी 2007 को संस्था का विधिवत पंजीकरण हुआ। इस नाते हम 19 जनवरी को संस्था का स्थापना दिवस मान सकते हैं।
चूंकि आज यह संस्था की पहली वार्षिक सभा है इसलिए संस्था की ओर से आयोजित अब तक के कार्यक्रमों का संक्षिप्त विवरण देना जरूरी जान पड़ता है जो इस प्रकार है-
- 18 फरवरी 2006 वसंतोत्सव
- 17 अगस्त 2006 ‘कुंजविहारी मिश्र’ द्वारा मैथिली-भोजपुरी, हिन्दी गीत-गजलों का कार्यक्रम ‘गीत गजल संध्या
- 16 नवंबर 2006 प्रेस दिवस के अवसर पर ‘प्रेस जनता और राजनीति (Press, People and Politics) विषय पर परिसंवाद
- 23 दिसंबर 2006 देहरादून के प्रसिद्ध कवि डा. अश्वघोष के सम्मान में ‘गीत-गजल सम्मेलन’
- 20 जनवरी 2007 मुम्बई के डा. लक्ष्मण दुबे एवं सागर त्रिपाठी के सम्मान में ‘गीत-गजल सम्मेलन’
- 12 फरवरी 2007 ‘हिन्दी ही क्यों नहीं’ विषय पर श्रीराम कालेज आफ कामर्स की हिन्दी साहित्य सभा के साथ मिलकर एक सेमिनार का आयोजन
- 13 माचZ 2007 युवा गजलकार गुंजन कुमार झा के द्वारा गीत-गजलों की प्रस्तुति
- 2 अक्टूबर 2007 ‘गांव गरीब और गांधी’ विषय पर एक परिसंवाद
- 14 नवंबर 2007 हिन्दी दिवस समारोह (वैश्विक बाजार और हिन्दी) विषय पर व्याख्यान के साथ साथ कवि सम्मेलन का आयोजन
- 8 अक्टूबर 2007 ‘मीडिया मूल्य और समाज’ विषय पर परिचर्चा
- 10 अक्टूबर 2007 ‘हिन्दी पत्रकारिता का सामाजिक दायित्व’ विषय पर परिसंवाद :
उक्त कार्यक्रमों के दौरान डा. अश्वघोष, आनन्द प्रधान, राजेन्द्र त्यागी, राजीव रंजन राय, श्वेता रंजन, डा. पी.सी. जैन, डा. वेद प्रताप वैदिक, अपूर्वानन्द, मार्को जोली, जवाहर कर्नावट, चैतन्य प्रकाश, वी.पी. सिंघल, डा. रवि चतुर्वेदी, डा. हरीश नवल, डा. स्मिता मिश्रा, डा. राजेश रस्तोगी, आलोक पौराणिक, वशिष्ठ नारायण सिंह, हरनेक सिंह गिल, डा. श्रीराम अरोड़ा, डा. प्रभात कुमार, डा. रमा, डा. आनन्द प्रकाश, अलका सिन्हा जैसे विभिन्न विद्वान, विशेषज्ञ, विचारक, लेखक, साहित्यकार, पत्रकार, राजनेता आदि के अतिरिक्त कुंजविहारी मिश्र, गुंजन कुमार झा, डा. सरिता शर्मा, राजेश रेड्डी, मंगल नसीम, नरेश शांडिल्य, राजगोपाल सिंह, रितु गोयल, गजेन्द्र सोलंकी, राजेश चेतन, श्रवण राही, मोहन मुंतजीर, राजेन्द्र राजा जैसे अनेक कवियों एवं कलाकारों ने अलग-अलग कार्यक्रमों में भाग लेकर संस्था का सहयोग किया।
संस्था की ओर से हाल ही में साहित्य कला और समाज की त्रैमासिक पत्रिका ‘सामयिक मीमांसा’ का प्रकाशन भी प्रारंभ किया गया। इसके अतिरिक्त संस्था आनेवाले दिनों में जमीनी स्तर पर कुछ महत्वपूर्ण कार्यक्रमों की योजना पर भी काम कर रही है।
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